
राजनैतिक दुनिया की और से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन हो गया है, दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। पिछले कई समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी, पर सांस लेने में दिक्कत शुरू होते ही उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उनका जाना बेहद दुखदाई है, राजनीति की दुनिया में उनका बोहोत बड़ा योगदान रहा है जोकि कभी भुला नहीं जा सकता। उनके जैसे महान पॉलिटिशियन के निधन पर सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं वल्कि सभी पार्टी के दिग्गज नेता शोक में है, और सभी नेता उन्हें श्रद्धांजलि भी देने पहुंचे।
Manmohan Singh Passes Away, देशभर में शोक की लहर
मनमोहन सिंह जी आज हमारे बिच नहीं रहे, 26 तारीख की शाम आठ बजे के आसपास उन्हें बेहोसी की हालत में दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया और रात नौ बजे पर उन्होंने मात्रा बानवे वर्ष की उम्र में आखरी सांस ली। भले ही आज वह हमारे साथ नहीं है, लेकिन उनका नाम राजनीति के दुनिया में ऐतिहासिक के तोर पर हमेशा याद रखा जायेगा।
उनके जिंदगी की बात करें तो उनका जन्म 26 सितंबर 1932 को हुआ था, कम उम्र में उनकी माता का निधन हो गया। बराह साल तक बिना विजली के एक बच्चे के तोर पर गरीबी से जूझते हुए अपने छोटे से घर में उन्होंने अपनी जिंदगी बिताई। पंजाब विश्वबिद्यालय के हिन्दू कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की, साथी ऑक्सफ़ोर्ड विश्वबिद्यालय से उन्होंने अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने इंग्लैंड गए थे।
वह बतौर आरवीआई के गवर्नर, देश के वित्त मंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री के तोर पर भारत देश की अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए कई सारे बड़े फैसले लिए थे। अपने काम के द्वारा इस देश को एक नई दिशा दिखाते हुए प्रगति की और लेकर गए थे।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर भारत की तमाम हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है, उनके निधन पर भारत में सात दिन के लिए राष्ट्रिय शोक घोषित किया गया है। सिर्फ भारत के मंत्री ही नहीं वल्कि विदेश के नेताओं ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
It is moment of poignant sorrow and grief for India and for Russia. Dr Manmohan Singh‘s contribution to our bilateral ties was immeasurable. His suave demeanor was always endearing as unquestionable was his expertise as an economist and his commitment to the progress of India. pic.twitter.com/rxjUQsFgj5
— Denis Alipov 🇷🇺 (@AmbRus_India) December 26, 2024
कनाडा के पूर्व पीएम से लेकर रुसी राजदूत सभी ने उन्हें याद किया, रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने एक्स पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को याद करते हुए उनके निधन को भारत और रूस के लिए बेहद दुखद बताया है। साथी भारत के प्रगति और अर्थव्यवस्था में उनके कुशलता और उनके योगदान की प्रशंसा की है।
इसके अलावा जापान के राजदूत ओनो केइची, भारत में फ्रांस के दूतावास और ऑस्ट्रेलियन कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने भी एक्स पर पोस्ट शेयर करके मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी है।
मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार
मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार शनिवार 28 दिसंबर की सुवह पुरे राजकीय सन्मान के साथ किया जायेगा। उनका पार्थिव शरीर उनके आवास से दिल्ली स्थित एआईसीसी के हेडक्वार्टर्स लाया जायेगा जहां सुवह आठ से नौ बजे तक लोग और कांग्रेस सहित सभी पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। उसके बाद सुवह नौ बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगी।
उनके द्वारा किये फैसलों की चर्चा आज भी है बरक़रार
साल 1991 भारत में आर्थिक संकट का दौर था, कारन था गल्फ वॉर यानि खारी युद्ध अमेरिका और इराक के बिच। इस युद्ध के कारन भारत में तेल की भरी कमी हो गई, और क्रूड आयल की कीमत आसमान छूने लगी। भारत के पास पैसा नहीं था, जाहिर है भारत इकनोमिक क्राइसिस का सामना कर रहा था।
उस समय केंद्र के नरसिंहा राव की सर्कार ने मनमोहन सिंह को अपना वित्त मंत्री चुना। जिसके बाद 1991 साल का बजट मनमोहन जी ने तैयार किया। केंद्र सर्कार उनके पहले बजट के ड्राफ्ट से खुस नहीं थे, जबकि दूसरी बार उन्होंने अपना ड्राफ्ट बनाया और 24 जुलाई को मनमोहन जी ने अपना बजट भाषण दिया।

इस बजट में उन्होंने कई बड़े फैसले किये जैसे की इंपोर्ट ड्यूटी, कस्टम ड्यूटी के शुल्क को घटाकर कम करना और इम्पोर्ट के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाना। साथी बजट में लिब्रलाइजेशन, निजीकरण और ग्लोबलाइजेशन की भी बात की गई थी।
उनके इस बजट की कई आलोचना हुई लेकिन उनकी नीति ने कमाल कर दिया, 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था दो सौ छियासठ डॉलर हो चुकी थी और अगले तिस सालों में यह चार बिलियन के आंकड़े को छू गई। अर्थव्यवस्था में इस परिणाम को देखते हुए पक्ष और विपक्ष के राजनेताओं के साथ आम नागरिकों ने भी रहत की सांस ली।
वित्त मंत्री बनने से पहले 1972 से लेकर 1976 तक भारत सर्कार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके थे, 1981 से लेकर 1985 तक आरवीआई गवर्नर रहे, और साल 1987 तक योजना आयोग के अध्यक्ष थे। उनके स्वच्छ और ईमानदार राजनेता की छवि को मध्य नजर रखते हुए कांग्रेस की पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुना। और साल 2004 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, और 2009 में भी एक बार फिर वह प्रधानमंत्री बने।
Disclaimer
आजकी लेख में दिए हुए सभी जानकारी खास सूत्रों और मनमोहन जी के जीवन को मध्य नजर रखते हुए जारी किया गया है। ऐसे ही और सारे महत्वपूर्ण खबर के बारें में जानने के लिए newskaghar24.com के वेबसाइट पर विजिट करें।