
आजकी इस आर्टिकल की शुरुवात हम एक प्रसिध्य भारतीय फिल्म के नाम लेकर शुरुवात करेंगे जिसका नाम हैं शोले। यह फिल्म 15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुयी थी, और इस फिल्म ने दुनिया को एक शानदार जोड़ी के साथ सिखाया की पक्की दोस्ती किसे कहते हैं, और क्या होती हैं यह पक्की दोस्ती।
और उस शानदार जोड़ी का नाम था जय और वीरू की जोड़ी, जिसे आज भी लोग खूब पसंद करते हैं।और आज 89 बर्ष के बीरु का किरदार निभाने वाले धर्मेंद्र ने 83 साल के जय, यानि अमिताभ बच्चन को इस दुनिया में अकेला छोड़ कर चले गए कभी ना लौटने वाले देश में। दर्शको में भी उनके जाने का यह दुःख हर एक फैन के आँखों में झलक रहा हैं।
मशहूर अभिनेता का हुआ निधन
बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र अब हमारे बिच नहीं रहे। धर्मेंद्र जी की पिछले कई दिनों से हेल्थ ख़राब चल रहा थी। साँस लेने में कठिनाई के कारन उन्हें हस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। अपने शरीर में रहत महसूस करने के बाद उन्हें घर लाया गया था।
लेकिन मौत से वह ज्यादा दिन संघर्ष नहीं कर पाए, और 24 नवंबर को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लोगो ने उन्हें स्क्रीन में जैसे देखते हुए आएं थें, असल जिंदगी में भी वह बिलकुल वैसे ही दिलवाले इंसान थें। किसी के दुखद बात या दुखद परिस्थिति में भाबुक हो जाते थें, और किसी के अच्छी और खुसी के मोके पर खुस भी हो जाते थें।
बॉलीवुड के सबसे बड़े फिल्म सितारों में से वह एक थें, 60 से भी ज्यादा सालों तक उन्होंने यह समझाया की बॉलीवुड के हीरो कैसे दीखता हैं। उन्हें बॉलीवुड का ही-मैन कहा जाता था। लेकिन जो बात उन्हें ज्यादा यादगार बनती हैं, वह सिर्फ उनकी ताकत ही नहीं, वल्कि उनका दिल उनकी सादगी। आज 89 वर्ष की आयु में धर्मेंद्र जी का देहांत हो गया, और भारतीय सिनेमा अब पहले जैसा कभी नहीं रहेगा।
हमारे आज की आर्टिकल के द्वारा उनके परिवार और उनके लाखो लोगो के प्रति गहरी सहानुभूति वक्त करते हैं जो उन्हें प्यार करते हुए उनके फिल्म देखते हुए बड़े हुए हैं।
Dharmendra Passes Away, धर्मेंद्र की लाइफ जर्नी
एक ऐसा हीरो जिसे हम कहते हैं ही-मैन ऑफ़ बॉलीवुड, जोकि और कोई नहीं वह हैं हम सबके पसंदीदा कलाकार धर्मेंद्र जी। धर्मेंद्र जी का पूरा नाम हैं धर्मेंद्र सिंह देओल। 8 दिसंबर 1935 को पंजाब में उनका जन्म हुआ था। उन्होंने आर्य हाई स्कूल और रामगढ़िया कॉलेज फगवाड़ा, पंजाब से मैट्रिक की पढाई की और वह साल था 1952। उनके पिता एक स्कूल के टीचर थें, और उसी स्कूल में पड़ते थें धर्मेंद्र।
उनके पिता जी का नाम केवल किशन देओल था, और उनके माता जी का नाम सतवंत कौर था। पड़ने लिखने में ज्यादा मन ना लगने के कारन उन्होंने सिर्फ मैट्रिक तक ही पढाई की थीं। फिल्मों के शौकीन होने के कारन उन्होंने हमेशा अपनी माँ से कहा करते थें की में भी फिल्मों में अभिनेता बनना चाहता हूँ।
वह अक्सर अपनी दिल की बात अपनी माँ को बता दिया करते थें, क्यूंकि अपनी माँ के साथ उनकी बोहोत गहरी दोस्ती थी, अपनी माँ से वह कहा करते थे की उन्हें पड़ने लिखने में ज्यादा मन नहीं लगता हैं, उन्हें अभिनय करने का शोक हैं। एक अभिनेता बनने का ख्वाब बचपन से ही उनके दिल में पनप रहा था।

सूत्रों के हिसाब से यह पता चला हैं की वह पहले रेलवे क्लार्क के तोर पर काम करते थें, और उस समय उनका वेतन मात्रा 125 रुपए था। लेकिन फिल्मों में आने का उनका वह चाहत छूट नहीं रहा था।
और उन्ही दिनों फ़िल्मफ़ेयर टैलेंट हंट के दौरान अर्जुन हिंगोरानी को धर्मेंद्र पसंद आ गए थें। और 1960 में जब अर्जुन हिंगोरानी ने ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ नाम की फिल्म बनाई तो उसके लिए धर्मेंद्र को साइनिंग अमाउंट के तोर पर 51 रुपए देकर हीरो के भूमिका के लिए उनके बिच एग्रीमेंट हो गया।
फिर 1962 में एक और फिल्म आयी, जिसका नाम था अनपढ़। फिर 1963 में आयी फिल्म बंदिनी, इन फिल्मों से लोगो ने धर्मेंद्र को जानना शुरू कर दिया।
हिंदी सिनेमा में वह उन कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने हर तरह के रोले निभाएं हैं, चाहे रोमेंटिक हो, एक्शन हो, या फिर दर्शको को मंत्रमुग्ध कर देने वाले फिल्म जोकि लोगो के दिलो पर घर कर जाते हैं।
धर्मेंद्र जी की आखरी फिल्म इक्कीस
पूरा देश धर्मेंद्र जी के निधन के खबर से मायुश हैं। शोले, धरम-वीर, सीता और गीता जैसे ब्लॉक बस्टर फिल्म देने वाले धमेंद्र जी की जिंदगी के आखरी पालों में भी दर्शको से ढेर सारा प्यार देखने को मिला। 2023 में वह रणवीर सिंह और आलिआ भट के साथ कारन जोहर की फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में नजर आएं।
और उनकी अपकमिंग फिल्म जोकि आखरी बन गयी, वह हैं इक्कीस। इक्कीस का पोस्टर और वौइस् नोट जारी किया गया हैं, और उसमे काफी इमोशनल लग रहे हैं। मैडॉक की यह फिल्म असल जिंदगी पर बेस्ड हैं। फिल्म में उन्होंने अरुण खेत्रपाल के पिता की भूमिका निभाई हैं।
अरुण खेत्रपाल 1971 की भारत पाक युद्ध में लड़ते हुए शहीद हुए थे, और उस वक्त वह केवल इक्कीस साल के ही थे। युद्ध में वीरगति प्राप्त करने के बाद उन्हें परम वीर चक्र से सन्मानित किया गया था। श्रीराम राघवन के द्वारा डायरेक्ट की गयी यह धर्मेंद्र जी की आखरी फिल्म हैं, इसकी रिलीज़ डेट में बदलाब करके 1 जनुअरी 2026 को रिलीज़ होने वाली हैं।
Disclaimer
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