
एक साल की एक नन्ही सी मासूम जान, जिसकी उम्र खेलने कूदने की हैं उस उम्र में यह बच्ची एक दुर्लभ बीमारी से गुजर रही है। रानाघाट की एक माध्यम वर्ग की परिवार में फिलहाल दुःख के वदल छाए हुए है, लेकिन अष्मिका के माँ बाप के इस दुःख का शायद हम में से कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता है।
कोई भी माँ बाप अपने आँखों के सामने अपनी औलाद को बीमारी से जूझते हुए नहीं देख सकता है, लेकिन अष्मिका की इस बीमारी का खर्चा बेहद ज्यादा है। इसलिए अष्मिका के माँ बाप ने सोशल मीडिया और अपने देश के जनता से मदद की गुहार लगाई है।
दुर्लभ बीमारी का शिकार अष्मिका, परिवार को कैसे लगा इसका पता
वेस्ट बंगाल के नदिआ जिले में रानाघाट शहर के दासपारा की रहने वाली है यह एक साल की नन्ही और मासूम सी जान अष्मिका दास। अष्मिका के माता पिता का नाम शुभंकर दास और माँ का नाम है लक्समी दास। साल 2024 में इन दोनों की बेटी का जन्म होता है, जिसका नाम हैं अष्मिका।
लेकिन उनके बेटीके जन्म के बाद ही अष्मिका के माता पिता की परिशानी बार जाती है। उनके बेटी अष्मिका के जन्म के चार महीने के अंदर पता चलता है की वह एक दुर्लभ रोग से ग्रस्त है, जिसका साइंटिफिक नाम स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी। इस बीमारी के कारन शरीर की ग्रोथ कम हो जाती है, बाकियों की तरह चलने फिरने में सक्षम नहीं होते है।
हलाकि की इस दुर्लभ रोग से मुक्ति पाने का एक उपाय हैं, और वह उपाय करोड़ रुपए का है। 16 करोड़ रुपए कीमत है इस बीमारी से मुक्ति देने वाले इंजेक्शन का। इसलिए एक माध्यम वर्ग परिवार से ताल्लुक होने के कारन उनके पास इतनी धन राशि नहीं है जिससे की वह अपनी बेटी को इस बीमारी से बचा पाए। एक माता पिता के पास इससे बड़ी लाचारी और क्या होगी।
अष्मिका के माँ बाप का कहना है, 1 साल में एक बच्चे के शरीर को जितना मजबूत होना चाहिए उस हिसाब से अष्मिका का शरीर बेहद कमजोर है। चलना तो दूर अपने पैरों में खरे होना भी अष्मिका के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। करोड़ रुपए की इंजेक्शन को खरीद पाना उनके लिए असंभव है, इसलिए अष्मिका के माता पिता जनता के पास अपनी बेटी की जान बचाने की गुहार लगा रहे है।
किस बीमारी से ग्रस्त है अष्मिका और क्या है इसका इलाज?
एक ऐसा बीमारी जोकि शरीर के ग्रोथ को रोक देता है, इस दुर्लभ बीमारी का इलाज तो है लेकिन कीमत इतनी ज्यादा है की हर एक माध्यम वर्ग के परिवार के लिए यह कीमत जुटा पाना लगभग असंभव है। 16 करोड़ रुपए की इस इंजेक्शन का नाम ज़ोलजेन्स्मा है। यह बीमारी जेनेटिकली रूप से होता है, इससे शरीर की ग्रोथ नहीं हो पाती है इसके अलावा शरीर के नसों और मांसपेशियों पर भी असर पड़ता है।
एक साल की यह बच्ची शायद नार्मल बच्चों की तरह खेल कूद नहीं पयेगी, नहीं अपने पैरों में चल पायेगी अगर उसे यह इंजेक्शन न मिला तो। इतनी बड़ी कीमत ने अष्मिका के माँ बाप को लचर बना दिया है। अपने शहर के हस्पताल में अष्मिका को ले जाने के बाद वहाँ के डॉक्टर ने इस बीमारी के बारें में कन्फर्म करके बताया है। इस बीमारी का इंजेक्शन उनके शहर में या फिर भारत में उपलब्ध नहीं है, इसको विदेश से लाना पड़ेगा।

इलाज के दवाई के लिए और कितना पैसा चाहिए
इस बीमारी को दूर करने के लिए और आजीवन इससे मुक्ति पाने के लिए एक बड़ी कीमती इंजेक्शन की जरूरत है। कुल 16 करोड़ रुपए चाहिए इस इंजेक्शन को खरीद ने के लिए। 16 करोड़ रुपए का जुगाड़ कैसे करेंगे यह उन्हें समझ नहीं आ रहा है, जिसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया ताकि अपनी बात को सब लोगो के बिच पोहोचा सके।
और उनका यह प्रयाश बिफल नहीं गया, सोशल मीडिया के द्वारा कई लोगो ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है ताकि अष्मिका को नई जिंदगी मिल सके और एक स्वाभाविक जीवन व्यतीत कर पाए। इसके अलावा कई सारे एक्टर, और एक्ट्रेस ने भी अपनी मदद का हाथ आगे बढ़ाया है।
हाल ही में मशहूर सिंगर कैलाश खेर रानाघाट शहर में अपने परफॉरमेंस के लिए आये थे। और उन्होंने इस नन्ही सी बच्ची के बीमारी के बिषय में बताते हुए एक वीडियो भी जारी कि है। साथी एक एनजीओ इम्पैक्ट ग्रुप ने भी अष्मिका के लिए जनता के द्वारा पैसा जुगाड़ करने के लिए अपना कदम आगे बढ़ाया है।
Ranaghat Ashmika के माता पिता क्राउड फंडिंग के जरिये फिलहाल चार करोड़ रुपए का इंतेज़ाम कर पाएं है। और अगले पांच महीने में इंजेक्शन को खरीद ने के लिए अभी भी बोहोत सारे पैसों की जरुरत है। उम्मीद है की पांच महीने के अंदर जरुरत के पैसे एकट्ठा हो जाएंगे, इम्पैक्ट ग्रुप और Ranaghat Ashmika के माता पिता भी यहीं आशा करते है।
Conclusion
आजके इस आर्टिकल में हमने अष्मिका से जुड़ी सभी सठिक जानकारी शेयर करने की कोशिश की है। Ranaghat Ashmika से जुड़ी सभी इनफार्मेशन पब्लिक सूत्रों और कुछ प्रसिध्य न्यूज़ चैनल के दी गई जानकारी के आधार पर जारी किया गया है। ऐसे ही और सारे जानकारी के लिए हमारे वेबसाइट newskaghar24.com में विजिट करें।