रतन टाटा जी के मुंबई स्थित घर में उनका पार्थिव शरीर ले जाया गया, जहांपर हजारों लोग शामिल हुए थे उनकी अंतिम विदाई के लिए।

अपनी करियर की शुरुवात उन्होंने साल 1961 में टाटा ग्रुप और टाटा स्टील में काम करके शुरुआत की।

साल 1991 में उन्होंने जे. आर. डी. टाटा के बाद टाटा ग्रुप की जिम्मेदारी ली और साथ ही इस कंपनी को एक नई ऊंचाइयों पर लेकर गए।

उनके लीडरशिप में टाटा ग्रुप नहीं केवल देश में वल्कि पुरे दुनिया भर में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई।

एक बड़े उद्योगपति होने के बाद भी रतन टाटा जी का स्वभाव सिम्पलिसिटी और दयालु भी थे, और उनकी यहीं बात उन्हें एक खास इंसान बनाता है।

86 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, पर सभी के दिलों में उनके विचार और उनके द्वारा किया गया हर काम को हमेशा याद रहेगा।

उनके आखिरी प्रोजेक्ट लिस्ट में जानवरों के लिए बनाया गया एक स्पेशल अस्पताल, जोकि जून 2024 में शुरू हुआ। और यह जानवरों के लिए उनकी दयालुता को दिखाता है।

उनके जाने पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है और देश के नौजवानो के साथ आने वाली पीढ़ी भी उनकी जिंदगी से प्रेरणा लेगी।